शहर के सबसे बड़े पार्क में झाड़ियों का जंगल, जहरीले जीवों का खतरा फिर भी शिकायतें बेअसर

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जगदलपुर। क्या नगर निगम किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या किसी बच्चे या नागरिक की जान पर बन आने के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी? शहर के सबसे पुराने और प्रमुख शहीद पार्क की मौजूदा हालत यही सवाल खड़े कर रही है। कभी शहरवासियों के सुकून और बच्चों की किलकारियों का केंद्र रहा यह पार्क आज झाडिय़ों, गंदगी और लापरवाही का प्रतीक बन चुका है। पार्क के भीतर कदम रखते ही ऐसा लगता है मानो यह कोई सार्वजनिक उद्यान नहीं, बल्कि महीनों से उपेक्षित पड़ा खाली मैदान हो। चारों ओर उगी घास, घनी झाडिय़ां और टूटी-फूटी व्यवस्थाएं साफ बता रही हैं कि यहां लंबे समय से नियमित रखरखाव नहीं हुआ है। सबसे गंभीर बात यह है कि इन्हीं झाडिय़ों के बीच कई बार जहरीले सांप और अन्य विषैले जीव दिखाई देने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद नगर निगम ने न तो झाडिय़ों की सफाई कराई और न ही सुरक्षा के कोई ठोस इंतजाम किए। शाम होते ही रोजाना दर्जनों परिवार अपने बच्चों को लेकर यहां पहुंचते हैं। लेकिन सुकून की तलाश में आने वाले लोग अब मनोरंजन से ज्यादा अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता करते दिखाई देते हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि पार्क की बदहाली को लेकर स्थानीय नागरिक कई बार नगर निगम में शिकायत कर चुके हैं। मीडिया भी समय-समय पर इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है, लेकिन जिम्मेदारों पर इसका कोई असर दिखाई नहीं देता।

पूजा-पाठ से शुरू हुई टॉय ट्रेन भी बंद

निगम में नई सरकार आने के बाद शहीद पार्क में पूजा-पाठ और विशेष अनुष्ठान के साथ टॉय ट्रेन की शुरुआत बड़े उत्साह से की गई थी। इसे शहर के बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र बताया गया था। लेकिन उद्घाटन की चमक कुछ ही दिनों में फीकी पड़ गई। टॉय ट्रेन अब बंद है और पार्क में मनोरंजन के नाम पर कुछ भी ऐसा नहीं बचा, जिससे परिवार यहां आने के लिए उत्साहित हों। उद्घाटन के समय किए गए दावे भी अब झाडिय़ों में गुम होते नजर आ रहे हैं।

जर्जर झूले, चारों तरफ गंदगी यही है पार्क का सच

पार्क में लगे झूले और खेल उपकरण भी बदहाल हो चुके हैं। कई झूले जर्जर हालत में हैं, फिर भी बच्चे मजबूरी में उन्हीं पर खेलते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बच्चे इन झूलों से गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन उनकी मरम्मत तक नहीं कराई गई। दूसरी ओर पार्क के कई हिस्सों में फैली गंदगी इसकी बदहाल तस्वीर को और बदतर बना रही है।

शहीदों के नाम वाले पार्क का भी नहीं रखा मान

जिस पार्क का नाम देश के शहीदों के सम्मान में रखा गया, उसी पार्क की यह उपेक्षा शहरवासियों को खल रही है। लोगों का कहना है कि यह केवल एक पार्क नहीं, बल्कि शहर की पहचान और शहीदों की स्मृति से जुड़ा स्थल है। इसकी ऐसी दुर्दशा न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि शहर की छवि भी धूमिल करती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि नगर निगम पार्क की देखभाल करने में सक्षम नहीं है, तो कम से कम लोगों की सुरक्षा के लिए इसे अस्थायी रूप से बंद कर दे।