2016 में ITI से घर लौटते वक्त हमले का आरोप, शरीर हुआ लकवाग्रस्त, इलाज के लिए पैसे नहीं, जांच से भी असंतुष्ट शशिकांत
धमतरी। दस साल पहले तक जिंदगी सामान्य थी। सपने थे, अपने पैरों पर खड़े होने की उम्मीद थी। लेकिन 11 नवंबर 2016 की एक घटना ने शशिकांत भरत की पूरी जिंदगी बिस्तर पर ला दी। ग्राम देवपुर, तहसील नगरी निवासी शशिकांत का आरोप है कि धमतरी भटगांव आईटीआई से घर लौटते समय दूकली-गजकन्हार मार्ग पर अज्ञात लोगों ने उन पर हमला किया। हमले के बाद उन्हें घायल अवस्था में सड़क किनारे फेंक दिया गया। इसके बाद उनका पूरा शरीर लकवाग्रस्त हो गया।

दस साल से बिस्तर ही दुनिया
शशिकांत का कहना है कि घटना के बाद से वह ठीक से चल-फिर नहीं सकते। इलाज की जरूरत लगातार बनी हुई है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे किसी बड़े अस्पताल में लंबे समय तक इलाज करा सकें। आर्थिक तंगी ने बीमारी की पीड़ा और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि समय पर बेहतर इलाज मिल जाता तो शायद जिंदगी की तस्वीर कुछ और होती।
पुलिस जांच पर भी उठाए सवाल
शशिकांत ने घटना की पुलिस जांच पर भी असंतोष जताया है। उनका आरोप है कि दस साल बीत जाने के बाद भी उन्हें वह न्याय नहीं मिला, जिसकी उन्हें उम्मीद थी। अब उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है, ताकि हमले के पीछे कौन था और उनके साथ क्या हुआ, इसका सच सामने आ सके।
इलाज और न्याय नहीं मिला तो इच्छामृत्यु की अनुमति दें’
लगातार बीमारी, आर्थिक परेशानी और न्याय की उम्मीद टूटने के बीच शशिकांत ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, कलेक्टर अविनाश मिश्रा और विधायक अंबिका मरकाम से भावुक अपील की है। उन्होंने बेहतर अस्पताल में इलाज की व्यवस्था कराने, मामले की सीबीआई जांच कराने और उनकी मांगों पर कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही कहा है कि यदि उन्हें न्याय और इलाज नहीं मिल सकता तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।
छत्तीसगढ़ के लोगों से भी मदद की अपील
शशिकांत ने प्रदेशवासियों से भी उनकी आवाज को शासन तक पहुंचाने और न्याय दिलाने में सहयोग की अपील की है। दस साल से बिस्तर पर पड़े शशिकांत की सबसे बड़ी उम्मीद अब यही है कि कोई उनकी पीड़ा सुनेगा और उनकी जिंदगी को फिर से उम्मीद की ओर ले जाने की कोशिश करेगा।






