धरमपुरा रोड पर सुरक्षा गायब, धूल, मलबा और गहरे गड्ढों के बीच जान जोखिम में डालकर गुजर रहे लोग

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जगदलपुर - त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही जगदलपुर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की असली परीक्षा शुरू हो गई है।...
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जगदलपुर। शहर में इन दिनों अगर किसी भी प्रमुख सडक़ पर निकल जाएं तो एक ही तस्वीर नजर आती है और वह है खुदी हुई सडक़ें, बिखरा मलबा, उड़ती धूल और सुरक्षा के नाम पर कुछ ही नहीं। शहर का शायद ही कोई इलाका बचा हो, जहां निर्माण कार्यों ने आम लोगों की मुश्किलें न बढ़ाई हों। इन दिनों सबसे चिंताजनक हाल धरमपुरा रोड का है, जहां सडक़ चौड़ीकरण और निर्माण कार्य के दौरान नियम-कायदों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया है। सवाल यह है कि आखिर यह काम किस मानक के तहत हो रहा है? इसका जवाब न ठेकेदारों के पास है और न ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के पास। धरमपुरा रोड पर सडक़ के दोनों किनारों को गहराई तक खोद दिया गया है। खुदाई से निकला मलबा कई जगह सडक़ किनारे ही ढेर कर दिया गया है, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए खतरा लगातार बढ़ रहा है। निर्माण स्थल पर न तो पर्याप्त बेरिकेडिंग है, न चेतावनी बोर्ड और न ही रात के समय रेडियम संकेतक। दिनभर उड़ती धूल से लोगों का चलना मुश्किल हो गया है, जबकि दोपहिया वाहन चालक फिसलने और दुर्घटना का शिकार होने के खतरे के बीच सफर करने को मजबूर हैं।

मंत्री के दौरे तक ही दिखे सुरक्षा इंतजाम

बीते महीने जब लोक निर्माण मंत्री अरुण साव जगदलपुर दौरे पर आए थे, तब यही निर्माण स्थल सुरक्षा मानकों से सुसज्जित नजर आ रहा था। जगह-जगह बेरिकेडिंग, रेडियम पट्टियां और चेतावनी संकेत लगाए गए थे, ताकि व्यवस्था दुरुस्त दिखाई दे। लेकिन मंत्री के दौरे के बाद हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आए। अब सुरक्षा के इंतजाम पूरी तरह गायब हैं और गहरे गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं, जो किसी भी समय बड़े हादसे की वजह बन सकते हैं।

ठेकेदारों पर पीडब्ल्यूडी का कोई कंट्रोल नही

शहर में ठेकेदार पूरी मनमानी से काम कर रहे हैं। उन पर न पीडब्ल्यूडी अधिकारियों का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। निर्माण कार्यों की निगरानी करने वाले अधिकारी शायद ही कभी मौके पर दिखाई देते हों। नतीजा यह है कि जहां काम शुरू हुआ, वहीं अधूरा छोड़ दिया गया और आम नागरिक रोजाना उसकी कीमत चुका रहे हैं। धरमपुरा रोड की स्थिति यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या निर्माण कार्य केवल फाइलों और निरीक्षणों तक सीमित रह गए हैं? जब तक सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कराया जाएगा और जिम्मेदार एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक विकास के नाम पर हो रहे ये कार्य लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि खतरे का कारण बनते रहेंगे। शहरवासियों की मांग है कि प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप कर निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराए, ताकि किसी बड़ी दुर्घटना से पहले व्यवस्था जाग जाए।

पीडब्ल्यूडी ईई बोले- सुधार करवाते हैं…

– पीडब्ल्यूडी के ईई दिनेश देवांगन ने बस्तर डायरी से बात करते हुए कहा कि वे धरमपुरा रोड में चल रहे काम को देखेंगे और संबंधित ठेकेदार से हो रही गलती को सुधरवाएंगे। राहगीरों को कोई तकलीफ ना हो इस बात का विभाग पूरा ख्याल रहेगा।