बीच सडक़ जेसीबी….चारों ओर मलबा और धूल का गुबार…कोई सुधार नहीं

 

ये खबर भी पढ़ें…
त्योहारों से पहले ही जाम के जाल में जगदलपुर….सडक़ पर बाजार-व्यापार से बढ़ी परेशानी
त्योहारों से पहले ही जाम के जाल में जगदलपुर….सडक़ पर बाजार-व्यापार से बढ़ी परेशानी
जगदलपुर - त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही जगदलपुर शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की असली परीक्षा शुरू हो गई है।...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

जगदलपुर। शहर की सबसे व्यस्त सडक़ों में शामिल धरमपुरा रोड इन दिनों विकास से ज्यादा खतरे की पहचान बन गई है। यहां चल रहे सडक़ निर्माण में सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन पीडब्ल्यूडी के अफसर तमाशबीन बने हुए हैं। सडक़ के बीचों-बीच जेसीबी लगाकर खुदाई की जा रही है, मलबा सीधे सडक़ पर फेंका जा रहा है और उसी मलबे में फिसलकर दोपहिया वाहन चालक रोज गिर रहे हैं। इसके बावजूद न तो निर्माण की कार्यप्रणाली में कोई सुधार दिख रहा है और न ही विभाग की ओर से कोई सख्त कार्रवाई। निर्माण स्थल पर उड़ रहे धूल के गुबार से राहगीरों का गुजरना मुश्किल हो गया है। धूल रोकने के लिए पानी का छिडक़ाव जैसे बुनियादी इंतजाम भी नजर नहीं आते। सवाल यह है कि आखिर पीडब्ल्यूडी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर ठेकेदार को खुली छूट दे दी गई है।बस्तर डायरी लगातार धरमपुरा रोड निर्माण की खामियों और जनसुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उजागर कर रहा है, लेकिन विभाग के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया। पूर्व ईई बतरा के समय भी यही हाल था और अब नए ईई दिनेश देवांगन के कार्यकाल में भी हालात जस के तस हैं।

सहमे हुए शब्दों में बोले ईई- ठेकेदार को नोटिस देंगे

पीडब्ल्यूडी के ईई दिनेश देवांगन का कहना है कि ठेकेदार को नोटिस जारी किया जाएगा। हालांकि सवाल यह है कि केवल नोटिस से क्या ऐसे ठेकेदारों की कार्यशैली बदल जाएगी? यदि नियमों का उल्लंघन लगातार हो रहा है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

ठेकेदार पहले भी कई विवादों में रह चुके है

निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदार पर पहले भी कई सवाल उठ चुके हैं। दलपत सागर में पानी चोरी जैसे गंभीर आरोपों से लेकर विभिन्न निर्माण कार्यों में जनसुरक्षा की अनदेखी की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके बावजूद उसे लगातार बड़े सरकारी काम मिलते रहे हैं। ऐसे में सवाल केवल एक ठेकेदार पर नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर भी है, जो शिकायतों और लापरवाही के बावजूद कार्रवाई करने के बजाय सिर्फ नोटिस की औपचारिकता निभा रही है वो भी सहमे हुए शब्दों में

अगर बात करे ठेकेदार की सेटिंग की तो ऐसा कहा जाता है कि इनसे पहले के अधिकारी की बात करे या अभी के अधिकारियों की बात करे अच्छी सेटिंग रहती है जिसका ये ठेकेदार भरपूर फायदा उठाते है